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PICTURE CAPTION: रंग भेद  


रंग भेद हमारे समाज  में एक विकृति दुर्गन्ध की तरह आज भी फैला हुआ है। वर्षों से चली आ रही इस विकृति मानसिकता पर कोई रोक नही लगी है अपितु बाजारवाद ने भी इसे बढ़ावा दिया है। पहले महिलाएं इस रंग भेद की शिकार थी आजकल पुरुषों की फेयरनेस क्रीम बाजार में आने से उन्हें भी मानसिक रूप से पंगु बनाने का कार्य शुरू हो गया है. आज भी  खासकर महिलाओं को चमड़ी के इस भेदभाव से गुजरना पड़ता है।

लोग कार्य व गुणों की क्षमता को तथाकथित सुंदरता के काले व गोरे रंग से आंकते हैं। यही कारण है कि बाजार में आने वाली "fairness cream" धड़ल्ले से बिकती हैं, अब क्रीम के साथ फेस पैक भी आने लगे, भाई यदि एक रूपया कमाओ तो ८० पैसे ऐसी चीजों में बर्बाद करो। पहले विज्ञापन में सिर्फ महिलाएं दिखाते थे अब पुरुषों के लिए भी यह दलदल बनना शुरू हो गया है। पुरुषों की फेयरनेस क्रीम बाजार में आने से उन्हें भी मानसिक रूप से पंगु बनाने का प्रयास किया जा रहा है। लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करना व उन्हें झूठी चमक दिखाकर फंसाना आमबात हो गयी है।

भारत में ऐसा बाजारवाद करोडो लोगों को अपने मायाजाल में फंसाकर झूठी आस दिखाकर लोगों के मन को पंगु बना रहे है, आजादी के बाद कुछ चीजे हमारे देश में स्थायी रूप से घर बनाकर रहने लगी उसमे से एक रंग भेद भी है जो आजकल सुंदरता का पर्याय बन गया है।  मुश्किल से १ - २ प्रतिशत लोग ऐसे होंगे जिन पर ऐसी बातों का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।

"Cinnemon" दालचीनी के रंग  को नहीं देखकर  यदि गुण को देखें तब उसका महत्व समझ आएगा; बेहद दुखद है जब माँ - बाप अपने ही बच्चे के दबे हुए रंग  निखारने  दादी माँ के नुस्के जैसी चीजे आजमा कर स्वयं अपने बच्चे को हीन भावना से ग्रसित कर अवसाद के अंतहीन दलदल में धकेल देते है। उन्हें अपनी क्षमता के मुताबिक कार्य में बढ़ावा देने की बजाय काली जैसे शब्दों के बाण चलाते हैं।  ऐसे बच्चे बड़े  होने पर भी रंग को अपनी कमजोरी मानकर  अवसाद, निराशा, आत्मविश्वास में कमी जैसी समस्या से  ग्रसित होतें है।  ऐसी विकृत मानसिकता के खिलाफ हमें स्वयं आवाज उठानी चाहिए। मैंने आज भी कुछ  ऐसी महिलाएं देखीं है जो न सिर्फ उम्र के पचास वर्षों को पार कर गई है किन्तु फिर भी काम्प्लेक्स की भावना उनमे नजर आती है। बचपन की वह फांस इस उम्र में भी उन्हें हीन भावना से ग्रसित कर रही थी।

रंग भेद के बारे में जितना भी कहा जाये  कम ही होगा, किन्तु मै स्वयं एक किस्सा साझा करना चाहती हूँ।  मेरे शरीर में मेलेनिन बहुत जल्दी बनता है जिसके कारण बचपन में रंग दबा हुआ था। बाल्यवस्था में जिसे देखो वह सांवली या काली कहकर संभोधित कर देता था। लोग बिन मांगी  सलाह देते फलां फलां नुस्खा आजमाओं बच्ची का रंग साफ़ होगा; कोई फेरेनेस क्रीम गिफ्ट कर देता कि यह सब लगाओ रंग साफ़ होगा, तब बालमन मन बेहद व्यथित होता था, मन में एक टीस सी उठती थी कि रंग को गुणों से ज्यादा महत्व दिया जाता है और संकीर्ण विचारधारा सदैव सामने होती थी कि सांवली लड़की से कौन शादी करेगा।  यह रंग मत पहनो, ऐसे मत रहो जैसे जुमले अक्सर सुनती थी, दबा रंग होने के कारन जब भी माँ ने फूल वाली फ्राक पहनाई  तो मुझे फूलन देवी कह कर चिढ़ाया जाता था। 

रंग भेद के कारन लोगों का रिश्तेदारों का मजाक उडाना बाल मन में भावनाओं को आहत करता था , व यही विचार आते थे कि इसमें मेरी क्या गलती है। कितना भी अच्छा काम करो सब रंग के नीचे दब जाता था। १० -१२ वर्ष की उम्र तक  ऐसी बातों ने पहले तो मुझे व्यथित किया फिर स्वयं पर विश्वास करना सीखा दिया, ऐसी बातों ने जहाँ मुझे अंतर्मुखी बनाया वहीँ मन ने अपनी उड़ान भरनी शुरू कर दी। मैंने जुबान से प्रतिकार नहीं किया अपितु खुद से प्यार करना सीखा, अपने शौक व गुणों को निखारने में हिम्मत जुटाकर स्वयं का आत्मविश्वास स्वयं ही बढ़ाया। युवावस्था में भीसांवली है ऐसी बातें  सुनकर मुझे लोगो की मानसिकता पर हंसी आने लगी थी।

मैंने अपने मन में प्रतिज्ञा की थी , कि  मुझे अपने गुणों को इतना निखारना है कि उसके सामने यह रंग नजर न आये। आज जो मेरे रंग पर हँसते हैं कल जरूर इन्हे अपनी नासमझी पर हंसी आएगी।  इसके लिए सर्वप्रथम खुद से प्यार करना जरुरी होता है। सबसे पहले खुद से प्यार करना सीखा, allrounder बनने  की मजबूत कदम बढ़ाएं , हर क्षेत्र में स्कूल कालेज में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। हर कार्य  पूर्ण शिद्द्त से निभाना शरूर बन गया था। फुटवाल, बैडमिंटन, बेसबोल, शतरंज, NCC, बासुंरी वादन , ड्रम, डांस, लेखन, अनगिनत मेरे जीवन के अंग बन गए। नित दिन मेरे प्रयासों से मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया व  हर सफलता से मेरी त्वचा निखरती रही। बुद्धि, ज्ञान  व गुण ऐसे अनमोल रत्न हैं जिन्हे कोई आपसे छीन नहीं सकता है अपितु हर उम्र में यह आपने चार चाँद लगाते हैं। ऐसी मानसिकता के खिलाफ स्वयं को इतना मजबूत किया कि रंग कहीं नजर भी नहीं आया।  मै पूर्ण आत्मविश्वास से कहती हूँ  मुझे मेरी त्वचा पर नाज है। मुझे अपने साँवले रंग से प्यार है। खुद से प्यार करो गुण खुद ब खुद निखर जायेंगे। 

"Please Do Not Judge A Woman On The Basis of Skin Colour"

-शशि पुरवार


Posted BY: Admin On 21/12/2018 Under Category of: Blog